वंशावली बाबा मेघवंशी रामदेव जी महाराज और सायर मेघवाल

 बाबा रामदेव जी महाराज  मेघवाल है और इन तथ्यों से साबित होता है ॥ बाबा रामदेव जी महाराज  सायर मेघवाल  के ही पुत्र थे ॥ और बाबा रामदेव जी महाराज और सायर जी मेघवाल की वॅशावली जो निम्न है ॥


जाँभा (जयपाल) से --चन्दहल

चन्दहल जी से = बिगहङ जी

बिगहङ जी से = भोजराज जी

भोजराज जी के दौ पुत्रो का नाम

(1) सायर जी (2) अङसी जी

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सायर जी के पुत्र रामदेव जी थे

(ठाकुर अजमाल के आदेशानुसार सायर जी ने अपनै पुत्र रामदेव

को बिरम के पालणे मे सुलाया था - जिन्हे लोग "अजमल घर

अवतारी" के रुप मे जानते है )

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अङसी जी के दौ सन्तान थी ।

(1) पुत्री "डालीबाई"

(2) पुत्र "मुन्जा जी "

नोट( डाली ओर मुँजा जी के माता पिता का देहान्त हो जाने के

कारण - डाली ओर मुँजा जी को सायर जी ने "पुत्र 'पुत्री के रुप

मे स्वीकार कर गोद लिया था - ओर सायर जी ने

ही उनका पालन पोसन किया था )-

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डालीबाई ने शायर जी के सानिध्य मे ही भक्ति साधना की थी ।

ओर रामदेव जी से पुर्व समाधि ले ली थी ।

जिसकी समाधि पर भाई मुँजाजी के परिवार वॅशज पीढीदर

पीढी सेवा करते आयै है ..जिनके टिकायत परिवार

की वॅशावली निम्नानुसार है

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सायर जी के बाद

मुन्जा जी से मोडा जी

मोडा जी से। डुँगर जी

डुँगर जी से। बीजल जी

बीजल जी से माला जी

माला जी से खीमा जी

खीमा जी से धन्ना जी

धन्ना जी से नॅगा जी

नॅगा जी से माना जी

माना जी से नाथा जी

नाथा जी से केशरा जी

केशरा जी से भूरा जी

भुरा जी से भीखा जी

भीखा जी से हरजी

हरजी से मुकना जी

मुकना जी से पुनम जी

पुनम जी से उत्तमचन्द जी

वर्तमान मे उत्तमचन्द जी का परिवार टिकायत है

स्वामी जी ने स्पष्ट कहा था

कि - बाबा रामदेव मेघवाल थे ।

इसिलिये -

(1) "बाबे रा रिखिया" केवल मेघवाल है ।- तॅवरो को क्यो नही ?

(2) बाबा का जम्मा जागरण आज भी केवल मेघवालो से

ही जगाया जाता है - ओर उन्ही को जम्मे मे प्रथम भोजन

कराया जाता है जिसे "रिखिया जीमावणा" कहा जाता है ।

तॅवरो को क्यो नही ?

(3) मारवाङ मे प्राचीन ओखाणे प्रचलित है कि -"रामदेव जी नै

मिलिया सो मेघ ही मेघ (मेघो रा देव रामदेव)

क्यो कहा गया ?

तॅवरो के विषय मे ऐसै ओखाणे क्यो नही कहै गये ?

(5) बिना माता पिता के कोई पालणे मे कैसे प्रकट हो सकता है ?

-बाबा को जिस कृष्ण व राम का अवतार बताकर "अजमल घर

अवतारी" बताया जाता है - वो राम ओर कृष्ण भी जन्म लेकर

आये थे - प्रकट नही हो पाये - तो रामदेव जी कैसे प्रकट

हो गये ?

(6) जो पालणा रामदेवरा मे लोगो को बताकर कहा जाता है

कि इसमे रामदेव जी प्रकट हुऐ थे - उस पालणे की वैज्ञानिक

तकनिक (कार्बन विधि) .से जाच करवानी चाहिये । कि वह 600

साल पुराना है या नही !

जिस पर विरोधिगण चुप थे ।

(7) अगर रामदेव जी तुवर राजपुत थे तो तुवरो की बही मे रामदेव

जी का नाम क्यो नही ? - इस पर तुवरो ने एक बही पेश की कोर्ट

मे - मगर कोर्ट ने वह बही पुरानी ओर प्रमाणिक नही मानी -

क्यो कि वह 600 साल पुरानी नही थी ।

(8) पुँगलगढ के पङियार रामदेव जी से नफरत क्यो करते थे ?

(10) बाबा रामदेव के समकालीन किसी भी चारण भाट कवि ने

उनकी महिमा वर्णन क्यो नही की ?

(11) रामदेव जी पर लिखै गये सभी इतिहास मे उनकी अवतार

तिथि ओर स्थान आदी समुचे इतिहास मे इतना मतभेद क्यो ?

(12) रामदेव जी की तुरनुमा समाधि पर उर्दू मे आयत लिखी हुई

है - ओर उनकी समाधि पर पहले दरगाह थी - जिस पर विक्म

सवत 14वी शताब्दी से 19वी शताब्दी तक किसी राव राजा ने

कोई मन्दिर निर्माण क्यो नही करवाया ?

(13) बाबा रामदेव ने मात्र 33 वर्ष की अल्पायु मे

ही समाधि क्यो ली ?- ओर समाधि को हरबुजी को परचा बताकर

क्यो तोङा गया ?

(14) बाबा की समाधि के आसपास कंई तुरनुमा (कब्र)

समाधिया पुजवाई जा रही है - वो समाधिया किसकी है - अगर वह

तुवर राजपूतो की समाधिया (शमसाण) है तो फिर वै

सभी मुसलमानों के कब्रिस्तान की तरह क्यो है ?

(15) विक्रम सॅवत 14वी से करीब 17वी शताब्दी तक 300

साल के अन्तराल मे कोई भी उची जाति वर्ण का स्वर्ण भक्त

कवि की अवतारवादी कथा वाणी वारता क्यो नही ?

ऐसै कॅई सैकङो विचारणिय

प्रशनो की झङी लगा दी थी स्वामी रामप्रकाशाचार्य

जी महाराज ने - जिनके उत्तर विपक्षीगण नही दे पाये ।

तब कोर्ट ने तुवरो को नोटीस पेश किया कि इन सवालो का जवाब

दे --

तब विरोधि गणो ने अपना केस वापस ले लिया - क्यो कि उन्है

पता था , कि अगर हमने पुख्ता प्रमाण सहित जवाब पेस

नही किये तो - कोर्ट का फैसला मेघवालो के पक्ष मे होगा ।

तब स्वामी जी की लिखी पुस्तको को मेले मे जबरन बिक्री से

रोका गया - तब स्वामी जी ने अपनी तरफ से कोर्ट मे अपील

की थी - कि विरोधिगण हमारै सवालो का जवाब दे -

अन्यथा हमारी पुस्तकों को बिकने से ना रोका जाये ।

तब विरोधिगण स्वामी जी को कंई गुमनाम धमकिया पेश करने लगै

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तभी देवस्थान विभाग ने बाबा रामदेव जी महाराज को मेघवंशी बताया

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